मामलों से निपटना
जांच-पड़ताल और अभियोजन
जांच-पड़ताल प्रक्रिया
धोखा-धड़ी के बड़े मामलों को सुलझाने के लिए बहुत से ऐसे दस्तावेज़ों की जांच करनी पड़ती है, जो जानबूझ कर अस्पष्ट और खंडित रुप में छोड़ दिए जाते हैं। इन दस्तावेज़ों की विभिन्न प्रकार की विशेषज्ञता वाले लोगों द्वारा जांच करनी पड़ती है (उदाहरण के लिए पुलिस, लेखाकार, वकील, बैंकर, शेयर दलाल और कम्प्यूटर विशेषज्ञ), जिससे यह निर्धारित किया जा सके कि क्या अपराध किया गया है और यदि किया गया है तो न्यायालय में ठोस और संगत रूप से प्रमाण प्रस्तुत किया जा सके।
मामले की बैठकें, जिनमें केस टीम के सभी सदस्य शामिल होते हैं। बैठकें जांच-पड़ताल के दौरान नियमित अन्तराल पर आयोजित की जाती हैं। इनमें कार्रवाई के संयुक्त रूप पर सहमति प्राप्त करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराया जाता है और इस टीम में सभी विभिन्न विशेषज्ञ जैसे स्वतंत्र अभियोजन वकील जो आमतौर पर प्रारम्भिक अवस्था में नियुक्त किए जाते हैं शामिल किए जाते हैं। प्रत्येक मुकदमे की समाप्ति पर मामले की समीक्षा करने और प्राप्त अनुभव से कुछ सीखने के लिए एक अंतिम बैठक आयोजित की जाती है।
यह निर्णय करना कि मुकदमा चलाना है या नहीं
मामलों की जांच-पड़ताल पूरी कर लेने के बाद हम कोई दण्डनीय कार्यवाही आरंभ करने से पहले इस बात पर विचार करेंगे कि क्या प्रत्येक सम्भावित प्रतिवादी के विरुद्ध प्रमाणों से दोष सिद्ध करने की वास्तविक संभावना है और क्या लोकहित में मुकदमा दायर करने की आवश्यकता है। हम कोड फॉर, क्राउन प्रोज़ेक्यूटर्स में वर्णित सिद्धांतों का पालन करते हैं, जो मुकदमा चलाने के बारे में CPS निर्णयों पर भी लागू होती हैं।